About Us

लोकशक्ति पार्टी का गठन में जनता को संगठित करके सही अर्थों में लोकतंत्र स्थापित करने के अपने सपने को साकार करने के उद्देश्य से किया गया ।देश के अन्य राजनीतिक दलों से इतर लोकशक्ति पार्टी वर्षों से न केवल सक्रिय राजनीति बल्कि अपने रचनात्मक एवम सामाजिक कार्यों के द्वारा भी समाज के शोषितों एवम वंचितों की सेवा में लगातार अपना योगदान कर रही है।देश के मौजूदा राजनीतिक परिवेश में जिस प्रकार से राजनीतिक मूल्यों का क्रमिक ह्रास हुआ है उसके मद्देनजर पार्टी अपनी राजनीतिक जवाबदेही को समझती है और बड़ी राजनीतिक जिम्मेवारी को निभाने के लिए सदैव तत्पर रहती है। वर्तमान में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पवन कुमार को बनाया गया है जिनके नेतृत्व में दिल्ली के साथ साथ देश के अन्य कई प्रांतों में जन आंदोलन चलाया जा रहा है

Mission

लोकशक्ति पार्टी जन कल्याण के अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह से समर्पित है और इसीलिए जमुना खादर के किसान और खेतिहर मजदूर को उनका हक दिलाने के लिए पिछले 27 फरवरी से आंदोलनरत है।पार्टी इस आंदोलन के माध्यम से ना केवल यामुना खादर के किसान मजदूर को उनका हक दिलाना चाहती है बल्कि पार्टी का ये आंदोलन उन सभी लोगो के लिए भी है जो झुग्गियों या अनधिकृत कॉलोनियों में नारकीय जीवन जीने को विवश हैं।लोकशक्ति पार्टी का लक्ष्य है कि दिल्ली सरकार एवं केंद्र सरकार इन झुग्गियों में रहने वाले लोगों को जमीन का मालिकाना हक दे एवं अनिधकृत कॉलोनियों को अधिकृत कर के उनमे बुनियादी सुविधा मुहैया कराए।

Vision

लोक शक्ति पार्टी का सिद्धांत समतावाद – लोक शक्ति पार्टी ” समतावाद “के सिद्धांतों पर आधारित विचारधारा को लेकर एक नए राष्ट्र निर्माण के लिए दृढ़ संकल्पित है समतावाद का सिद्धांत सभी मनुष्यों के समान मूल्य और नैतिक स्थिति की संकल्पना पर बल देता है। समतावाद का दर्शन ऐसी व्यवस्था का समर्थन करता है जिसमें सम्पन्न और समर्थ व्यक्तियों के साथ-साथ निर्बल, निर्धन और वंचित व्यक्तियों को भी आत्मविकास के लिए उपयुक्त अवसर और अनुकूल परिस्थितियाँ प्राप्त हो सकें। समतावाद समाज के सब सदस्यों को एक ही शृंखला की कड़ियाँ मानता है जिसमें मज़बूत कड़ियाँ कमज़ोर कड़ियों की हालातसे अप्रभावित नहीं रह सकतीं। उसका दावा है कि जिस समाज में भाग्यहीन और वंचित मनुष्य दुःखमय, अस्वस्थ और अमानवीय जीवन जीने को विवश हों, उसमें भाग्यशाली और सम्पन्न लोगों को व्यक्तिगत उन्नति और सुख समृद्धि प्राप्त करने की असीम स्वतंत्रता नहीं दी जा सकती। वस्तुतः समतावाद स्वतंत्रता और समानता में सामंजस्य स्थापित करना चाहता है। इसे एक विवादितसंकल्पना इसलिए कहा गया है कि समानता के कई स्वरूप हो सकते हैं और लोगों के साथ समान व्यवहार करने के भी अनेक तरीके हो सकते हैं।